Thursday, December 16, 2010
सिक्स्थ सेंस
यह संवाद तीनो दोलों की एक साथ आने वाली अपने के बाद दूसरी फिल्म यमला पगला दीवाना में बोब्बी देओल अपने पिता धर्मेन्द्र को कहते है । इस संवाद का अपने आप में कोई महत्व नहीं है , पर चूकि परदे के दो पात्र वास्तविक जिंदगी में पिता पुत्र हैं अतः यह संवाद खास हो जाता है , क्योंकि परदे पर एक पुत्र द्वारा अपने पिता के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग पहली बार किया गया है और येही बात इस संवाद की खासियत , जीवन्तता या लोकप्रियता होगी । अगर फिल्म प्रदर्शित होने के बाद यह संवाद आधुनिक यूथ आइकॉन बन जाए तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा । यह संवाद उदारीकरण के बाद के भारत में बदलते परिवेश की नई कथा कहेगा और पिता पुत्र के रिश्ते को फिर से परिभाषित करेगा । एक कहावत प्रचलित है कि बेटे के पैर में बाप का जूता आ जाए तो पिता पुत्र का रिश्ता दोस्ती में तब्दील हो जाता है और इसी कहावत को यह संवाद सार्थक कर दिखाता है । यह भी गौरतलब है कि कई लोगों द्वारा इसकी आलोचना भी होगी , पर आलोचना हो या प्रसंशा , यह फिल्म कि लोकप्रियता और बॉक्स ऑफिस कसौटी को निशाया हीं प्रभावित करेगा । और बदलते समय के साथ मजाकिया हीं उच्च उच्च तथा उच्च मध्य घरानों में यह संवाद पुत्रों द्वारा प्रयोग भी किया जायेगा , थोड़े बहुत परिवर्तनों के साथ । ९० के दशक में ऐसा हिन् एक संवाद महेश भट्ट की बहुचर्चित फिल्म 'आशिकी 'में नायक राहुल राय द्वारा अपनी माँ रीमा लागू को कहा गया था ' यू आर सेक्सी '। लेकिन तब दोनों पात्र रियल लाइफ में माँ पुत्र नहीं थे । पर इस बार दोनों चरित्र वास्तविक पिता - पुत्र हैं अतः हंगामा तो बरपेगा ही और टिकेट खिडकियों पर नोट भी ।
Tuesday, March 23, 2010
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